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मन को मत मारो

मन को मत मारो,,,,,अरे मन को मत मारो भाई ,,,,,,,, मारो ,बिल्कुल मारो अपने दुश्मनों को मारो लेकिन पहले सोचो तब मारो ,,, लेकिन, मन को मत मारो,,, चुनो उसे , बलभर धुनों उसे लेकिन, जरा ठहरो , सोचो तब मारो , मन के भीतर की गुफाओं में झाँकों और देखो, कहीं वह हमीं तो नहीं जो बने हुए हैं बाधा अपने ही राह के ढूढ़ निकालो उसे फिर मारो मन को मत मारो,,,,,,,,
मै आज का कवि हूँ  सच सच बोलता हूँ  लिखता उतना ही हूँ जितना बोलता हूँ  मै आज का कवि हूँ सच सच बोलता हूँ  भले उदय खिल्ली जमाना, फिर भी हृदय की बात बोलता हूँ  मै आज का कवि हूँ  सच सच बोलता हूँ  नहीं गढ़ता मै दुनिया कल्पना की, अपने शब्दों से अपने को ही तोलता हूँ   मै आज का कवि हूँ  सच सच बोलता हूँ  जनता हूँ नहीं हो सकती क्रांति  मेरे लिखने मात्र से पर क्या करू  शोषित हूँ शोषित की भाषा बोलता हूँ  मै आज का कवि हूँ  सच सच बोलता हूँ  न जाने कितनी लिखी गयी होंगी कवितायेँ 

न कुछ में जीते हैं

अपना सब कुछ सौंपकर  'सब कुछ' को, चलो,   न कुछ में जीते हैं  बहुत हो चुका मैं, मेरा, तुम्हारा  और अपनेपन का दिखावा  चलो  न कुछ में जीते हैं ,,,,,,,,,,लालू  

न कुछ में जीते हैं

अपना सब कुछ सौंपकर  'सब कुछ' को, चलो,   न कुछ में जीते हैं  बहुत हो चुका मैं ,मेरा , तुम्हारा  और अपनेपन का दिखावा  चलो  न कुछ में जीते हैं ,,,,,,,,,,लालू  

चलो एकांत में चलते हैं

चलो एकांत में चलते हैं  कुछ देर पैदल ही सही  भले उजाला न हो वहां  अँधेरे में ही चलते हैं  चलो एकांत में चलते हैं  बहुत घूम चुके इस चकाचौंध की रौशनी में  अब अँधेरे में ही घुलते है  चलो एकांत में चलते है क्यों न करे , हम अँधेरे का ही चुम्बन  लेकर बाँहों में सो जाएँ उसे,  आखिर  अँधेरे से ही रोशनी निकलते है चलो एकांत में चलते है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,लालू  

माँ

 आखिर क्यों माँ होने का मतलब  सिर्फ माँ ही समझती है, अपने बच्चों के जीवन में अपना जीवन समझती है  बच्चा रोये तो रोये ,मुस्कुराये तो मुस्कराती है आखिर क्यों माँ होने मतलब सिर्फ माँ ही समझती है 

आज की सच्चाई

सांचे पहले से बने है तुम केवल अपना नाप दो// बहस मत करो जो लिखा है श्यामपट पर बस उसे छाप दो// लिखा होगा कहीं  कि शिक्षा में छिपी नैतिकता है तुम्हे चाहिए कौन सी डिग्री बस उसका दम दो// ज़माने में गर टिकना है तुम्हे, तो ज़माने को समझ नहीं तो अपनी जबान को लगाम दो //  क्यों वकालत करता फिरे  बुद्ध ,जैन उपदेश की  आज का सच है यही  ये बात तुम जान लो ,,,,,,,,,,,,,                                                          ''लालू "